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हिंदी कहानी कुसुम --

Image By Pinterest/Hindi kahaniya new


कुसुम सोचते सोचते कमोड पर बैठ कर यूरिन पास करने लगी , उसके न चाहते हुए भी उसके आँखों के सामने वही पोजीशन सामने आये जा रही थी , जैसे तैसे कर उसने अपना काम निपटाया और फिर से बापस जाने के लिए तैयार हुयी , जाते समय फिर से उसकी अनायास ही नजर बापस उसी तरफ चली गयी , इस बार और भी हक्की बक्की रह गयी थी , इस बार पिछली बार से भी कॉम्प्लिकेटेड पोजीशन में थे , उसे देख कर , कुसुम कहती हुई चली गयी "भैया को भी न जाने क्या ही सूझा है आज , लगता है सब आज ही आजमा के मानेगे , "

चलो ठीक है तुम्हारी लाइफ है जो करना है करो लेकिन पास बाले कमरे में लेटे इंसान का भी तो ध्यान रखो , कम से कम गेट तो लॉक किया होता | और भी न जाने क्या क्या सोचने लगती है |


"संदीप तुम आज न जाने क्यों अजीव सा बिहेब कर हो " सुनीता ने मादक आह भरते हुए कहा 

संदीप खुश हुआ और बोला "सोचा आज कुछ स्पेशल करता  हूँ "

बोलते बोलते संदीप ने थोड़ा और जोर लगा दिया , इससे सुनीता के मुँह से तेज आह निकल जाती है |

इस आह की आवाज ने एक बार फिर कुसुम को हिला के रख दिया , जैसे तैसे करके वो सोने की कोशिस कर रही थी , अब उसने अपने बाल नौच लेने चाहे लेकिन ऐसा करने से उसका ही नुकसान होने वाला था , इसलिए उसने अपने हाथो से पकड़े हुए अपनी बाल बापस छोड़ दिए | और तकिया से अपना मुँह जोर ढक कर सोने की कोशिश करने लगी |

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"मुझे लग रहा है आज तुमने जरूर कोई जोश बर्धक मेडिसिन ली है , नहीं तो इतना  तुमने मुझे कभी नहीं सताया था " सुनीता ने टूटी हुयी अबाज में कहा 

"नहीं यार तुम्हे मेरी मर्दानगी पर शक है क्या " संदीप अपनी स्पीड और तेज करते हुए कहा 

कुसुम बोली "नहीं यार ऐसे तुमने शादी से लेकर कल तक नहीं किया था न जाने आज तुम्हे क्या ही सूझा है "

संदीप ने एक जोरदार चुंबन लेते हुए अपने आप को रोकते हुए कहा "आज मैं अपनी ऑफिस में था तो यही सोच रहा था की कैसे लोग अपनी fantasy पूरी करते  है तो आज मैंने भी मूड बना लिया था "

सुनीता ने सदीप के बम पर हलकी सी चपत मारते हुए पूछा "तो फिर तुमने शाम को ही क्यों नहीं किया ये सब "

संदीप अब अलग होते हुए बोला "तुमने मौका ही कब दिया शाम को , पूरा मूड ख़राब कर दिया था " 

सुनीता अब संदीप की और देख कर मुस्कराने लगी , और साइड हो कर लेट गयी ताकि संदीप भी उसके पास लेट सके |

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कुसुम को ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे उसके शरीर पर चीटिया चल रही हो , उसे अब नींद दूर दूर तक नहीं थी, वो लगातार करबटें बदल रही थी , करबाते बदलते बदलते उसे रोहित की याद आने लगी थी , कैसे उसने उस दिन प्यार से कुसुम को छुआ था , उसके बदन को अपने हाथो से सहलाया था , धीरे धीरे करके एक एक याद तजा हो रही थी , मानों उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था की जैसे जैसे बो सब कुछ याद कर रही है और उसे कोई बैसे बैसे छुए जा रहा है , अब बो अपने आप को रोक नहीं पा रही थी , उसकी सांसे तेज हो चली थी , उसका गला प्यास के मारे सूखा जा रहा था , लेकिन उसे ये अहसास लगातार हो रहा था की मानों सच में कोई उसके पार्ट्स टच कर रहा हो और उसे प्रेरित कर रहा हो कुछ अलग सा करने के लिए | उसे अपने जेहन में कोई और नहीं बल्कि रोहित की परछाई ही नजर आ रही थी , अभी के लिए बो रोहित को ही फील कर रही थी अपने आजू बाजू | लगातार उसे इसीतरह की अनुभूति एक अजीव सा सुख प्रदान कर रहा था , वो लगातार उसी पोजीशन में रहना चाह रही थी , अब उसके मुँह से हलकी हल्की सी आवाजे भी आने लगी थी , एक बार के लिए तो वो खुद नहीं समझ पा रही थी की वो कुछ कर रही है या फिर कुछ ऐसा हो रहा है जिस पर उसका कोई जोर नहीं है , वो न चाहते हुए भी जो हो रहा है होने दिए जा रही थी | ऐसा करते करते थोड़ी देर बाद बो खुद को शांत पति है और एक अजीब से अहसास फील कर रही थी जो की उसे अंदर से आनंदित कर रहा था अब उसके शरीर में पहले जैसा कुछ नहीं हो रहा था , बल्कि उसका शरीर हल्का और ठंडा सा फील कर रहा था मानों उसने कोई फिजिओ थेरेपी ली हो | जो भी हो लेकिन उसके साथ ऐसा पहली बार हुआ था इसलिए उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था |

अब जब वो अपनी सुध बुध में बापस आ चुकी थी तो उसने पाया की उसे अपने प्राइवेट पार्ट्स के पास कुछ गीला गीला महसूस हो रहा है और साथ ही उसने पाया की उसके एक हाथ तो उसके अंडरगार्मेंट्स के अंदर ही है |


छी ये क्या है , क्या किया है मेने , छी करते हुए उसने अपना हाथ कपड़े से साफ किया , अब बो सोचने लगी कही मैंने ही तो नहीं किया ये सब ????

क्युकी अब उसे सुकून महसूस हो रहा था इसलिए न जाने उसे कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला |

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अगली सुबह सुनीता के कहने पर संदीप ने रोहित के पास कॉल किया 

रोनित ने कॉल रिसीव किया और फिर बोला 

हेलो , नमस्ते भैया जी 

"नमस्ते , कैसे हो , और अब पापा जी कैसे है आपके ?" संदीप ने पूछा 

रोहित ने जवाव दिया "जी वो अब बिलकुल ठीक है , और घर पर ही है "

संदीप ने कहा "चलो फिर तो ठीक ही है , जल्दी से और भी अच्छे हो जायेगे "

रोहित ने कहा "हाँ वो जल्दी से रिकवर कर रहे है "

संदीप ने अब फ़ोन सुनीता को दे दिया था , 

सुनीता ने भी रोहित से घर के हाल चाल जाने और फिर कहा "रोहित एक जरुरी बात करनी है "

"जी बोलिये भाभी जी " रोहित ने पूछा 

"रोहित देखो तुम्हे तो पता ही है की कुसुम प्रेग्नेंट हो गयी है , इसलिए हम चाहते है की आप शादी जल्दी से करलो " सुनीता ने सदीप से बचते हुए कहा 

सुनीता की बात सुन कर रोहित एक मिंट के लिए स्तब्ध रह गया मानों उसे ऐसा कुछ पता ही नहीं हो |

उसे पता था लेकिन ये नहीं पता था की ये बात उसके घर तक पता चल जाएगी इसलिए ....

रोहित ने शरमाते हुए कहा "हम्म , देखते है , आप ऐसा करो पापा से बात करो इसके लिए "

सुनीता ने कहा "ठीक है हम कल ही भेजते है उन्हें आपके घर "

प्रणाम करते हुए फ़ोन काट दिया जाता है 

अब रोहित तो सदमे में चला जाता है की उसने ये सब अपने घर भी बता दिया , अगर बात छुपा के रखती तो क्या ही हो जाता है , अब क्या करू अपना सर मलते हुए रोहित बाहर पड़े काउच पर बैठ जाता है |||

और अब उसके फ़ोन की स्क्रीन पर शीतल का कॉल आ रहा होता है.......................

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